
देव दीपावली 2026 कब है: कार्तिक पूर्णिमा की तारीख और मुहूर्त
मंगलवार 24 नवंबर। वाराणसी में दीपदान का मुहूर्त शाम 5:08 से 7:47 बजे तक, और इसी पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती भी है।
ShaadiNews Desk
Rituals & Planning
Editorial Summary & Key Highlights
देव दीपावली 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन है। वाराणसी में दीपदान का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 5:08 से 7:47 बजे तक है। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात 11:42 बजे शुरू होकर 24 नवंबर रात 8:23 बजे खत्म होती है, और दृक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा व्रत 24 नवंबर को है, जब दिल्ली में चंद्रोदय शाम 5:01 बजे है। देव दीपावली, यानी देवताओं की दिवाली, शिव के त्रिपुरांतक रूप में त्रिपुरासुर के वध की याद में मनाई जाती है, और वाराणसी में यह गंगा स्नान का सबसे लोकप्रिय दिन है। इसी पूर्णिमा को पुष्कर मेले का परंपरागत समापन, ओडिशा में बोइता बंदाण, दक्षिण में कार्तिकेय जयंती, मत्स्य अवतार का दिन, पालीताणा की जैन यात्रा और गुरु नानक का प्रकाश पर्व है। यह तुलसी विवाह करने का आखिरी दिन भी है।
Key Insights
- •देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को हैं। वाराणसी में मुहूर्त शाम 5:08 से 7:47 बजे तक है।
- •पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात 11:42 से 24 नवंबर रात 8:23 बजे तक है, और पूर्णिमा का व्रत 24 नवंबर को है।
- •कार्तिक पूर्णिमा तुलसी विवाह का आखिरी दिन है, और इसी दिन गुरु नानक जयंती का गुरपुरब मनाया जाता है।
रात में घाट पर अग्नि के साथ आरती करते पुजारी।
देव दीपावली 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन। वाराणसी में दीप प्रदोष काल में, शाम 5:08 से 7:47 बजे के बीच जलाए जाएंगे। कार्तिक पूर्णिमा 2026 भी इसी दिन है, इसी दिन गुरु नानक जयंती का गुरपुरब है, और परंपरा के अनुसार पुष्कर मेले का आखिरी दिन भी।
समय
पूर्णिमा तिथि सोमवार 23 नवंबर रात 11:42 बजे शुरू होकर मंगलवार 24 नवंबर रात 8:23 बजे खत्म होती है, भारतीय समय से। दृक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा का व्रत मंगलवार 24 नवंबर को है, और दिल्ली में उस दिन चांद शाम 5:01 बजे निकलेगा।
“"दीपदान करना है तो रात 8:23 बजे से पहले कर लीजिए, जब पूर्णिमा खत्म हो जाती है।"”
वाराणसी में देव दीपावली का मुहूर्त, शाम 5:08 से 7:47 बजे तक, पूरी तरह तिथि के भीतर है। दीपदान करना है तो रात 8:23 बजे से पहले कर लीजिए, जब पूर्णिमा खत्म हो जाती है।
देवताओं की दिवाली
देव दीपावली का अर्थ है देवताओं की दिवाली। कथा है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरांतक रूप में एक ही बाण से त्रिपुरासुर और उसके तीनों नगरों का नाश किया था, और देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसीलिए इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं।
वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान का साल का सबसे लोकप्रिय दिन है। शाम को घाटों पर हजारों मिट्टी के दीये जलते हैं, लोग पुजारियों को दीपदान करते हैं, और घरों व शिव मंदिरों में रात भर दीये जलते रहते हैं।
देश भर में कार्तिक पूर्णिमा
पुष्कर में मेला परंपरा के अनुसार प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस दिन पुष्कर सरोवर में स्नान को मोक्ष देने वाला माना जाता है। मेले में करीब दो लाख लोग और पच्चीस हजार ऊंट जुटते हैं।
ओडिशा में बोइता बंदाण मनाया जाता है, जिसमें केले के तने से बनी छोटी नावें पानी में छोड़ी जाती हैं, पुराने कलिंग के समुद्री व्यापार की याद में।
दक्षिण भारत में यह दिन कार्तिकेय के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर समेत वैष्णव मंदिरों में रासलीला होती है। यह दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के प्रकट होने का दिन भी माना जाता है।
जैन श्रद्धालु पालीताणा और शत्रुंजय पहाड़ियों की यात्रा करते हैं, जिन्हें जैन मान्यता में पहले तीर्थंकर आदिनाथ ने पवित्र किया था।
सिख आज आमतौर पर कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के रूप में मनाते हैं। कुछ सिख विद्वान इस तारीख से असहमत हैं, क्योंकि आधुनिक शोध उनका जन्म वैसाख, यानी अप्रैल में मानता है।
तुलसी विवाह की आखिरी तारीख
जिन परिवारों में इस मौसम में शादी है, उनके लिए यह पूर्णिमा व्यावहारिक रूप से भी अहम है। प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होने वाली अवधि में तुलसी विवाह करने का आखिरी दिन कार्तिक पूर्णिमा है। 2026 में वह एकादशी, यानी देव उठनी एकादशी, शुक्रवार 20 नवंबर को है।
दीपदान और दान
इस दिन कार्तिक स्नान, यानी नदी या किसी पवित्र जल में स्नान, का विधान है। दान, व्रत और दीप जलाना भी बताया गया है। कुछ मंदिरों में 360 या 720 बत्तियों वाले दीये जलाए जाते हैं, और तेलुगु परिवार शिव मंदिरों में 365 बत्तियों वाला तेल का दीया जलाते हैं। नदियों में दीये बहाए जाते हैं और तुलसी, पीपल और आंवले के पेड़ के नीचे भी दीये रखे जाते हैं।
आगे क्या
कार्तिक खत्म होते ही शादियों का मौसम पूरे जोर पर होता है। दिसंबर 2026 में सात विवाह मुहूर्त हैं, जिसके बाद खरमास में कैलेंडर बंद हो जाता है, और राम-सीता के विवाह की वर्षगांठ विवाह पंचमी सोमवार 14 दिसंबर को है।
Quick Facts
- देव दीपावली 2026
- मंगलवार, 24 नवंबर
- वाराणसी मुहूर्त
- शाम 5:08 से 7:47
- पूर्णिमा तिथि
- 23 नवंबर 11:42 से 24 नवंबर 8:23
- पूर्णिमा व्रत
- मंगलवार, 24 नवंबर
- दिल्ली चंद्रोदय
- शाम 5:01
- इसी दिन
- गुरु नानक जयंती, पुष्कर मेले का समापन
वाराणसी का मुहूर्त दृक पंचांग के वाराणसी देव दीपावली पृष्ठ से, और तिथि, व्रत की तारीख और दिल्ली का चंद्रोदय नई दिल्ली के कार्तिक पूर्णिमा पृष्ठों से है। कथा और क्षेत्रीय परंपराएं विकिपीडिया के कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली लेखों से हैं, जिनमें यह भी दर्ज है कि गुरपुरब की तारीख पर कुछ विद्वान असहमत हैं।
Reporting Sources:

Reader Reflections & Discussion (2)
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